
बलराज साहनी के जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करने वाली पुस्तक
पुस्तक समीक्षा : 'बलराज साहनी एक समर्पित और सृजनात्मक जीवन', सम्पादक : ज़ाहिद ख़ान, प्रकाशक : गार्गी प्रकाशन नई दिल्ली, पेज़ : 208, मूल्य : 240 रुपए
Cultural movements and educational issues

पुस्तक समीक्षा : 'बलराज साहनी एक समर्पित और सृजनात्मक जीवन', सम्पादक : ज़ाहिद ख़ान, प्रकाशक : गार्गी प्रकाशन नई दिल्ली, पेज़ : 208, मूल्य : 240 रुपए

इप्टा के राज्य सम्मेलन में 'सदाचार का तावीज़' के ज़रिए गूँजे परसाई के बोल

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9-10 अप्रैल, प्रगतिशील लेखक संघ का स्थापना दिवस

'कोमल गांधार' के एक दृश्य में, मंच पर खड़ा वृद्ध रिफ्यूजी भृगु बार-बार अपने छूटे हुए देश, पद्मा नदी और जीवन की आदतों को याद करते हुए पूछता है—“रिफ्यूजी क्यों बनूँ?” दूसरी आवाज़ उत्तर देती है—“रोटी मिलेगी, इसलिए जाओ उस पार, बाबुओं ने कागज़ में नाम दे दिया है—रिफ्यूजी।”

"लोगों से प्रेम करना, उनकी सेवा करना और उनके लिए बोलना...और यह सब कला के माध्यम से अभिव्यक्त होना चाहिए।''- ऋत्विक घटक

केंद्रीय सत्ता राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की स्वतंत्रता को समाप्त कर उन्हें अपाहिज बनाकर अपनी कृपादृष्टि का पात्र बनाने की राजनीति कर रही है।

संदर्भ: 23 नवम्बर अफ़साना—निगार कृश्न चन्दर का जन्मदिवस।