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Workers' rights, trade unions, employment, and industrial relations

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10 मार्च को विश्व शांति के लिए साम्राज्यवाद-विरोधी युद्ध दिवस के रूप में मनाया जाए

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच द्वारा 7 मार्च 2026 को निम्नलिखित वक्तव्य प्रेस को जारी किया गया।

ट्रेड यूनियनसीटीयूकेन्द्रीय ट्रेड यूनियन
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया 10 मार्च को विश्व शांति के लिए साम्राज्यवाद-विरोधी युद्ध दिवस के रूप में मनाने का आह्वान

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच द्वारा 7 मार्च 2026 को निम्नलिखित वक्तव्य जारी किया।

सीटीयूकेन्द्रीय ट्रेड यूनियनएआईटीयूसी
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12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और बड़े पैमाने पर लामबंदी की ओर।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र सेक्टोरल फेडरेशनों और एसोसिएशनों के संयुक्त मंच द्वारा 9 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निम्नलिखित बयान जारी किया।

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आम हड़ताल12 फरवरी आम हड़तालकेन्द्रीय ट्रेड यूनियन
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एआईफुक्टो ने 12 फरवरी 2026 की देशव्यापी हड़ताल का किया समर्थन दिखाई पूर्ण एकजुटता

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एआईफुक्टोऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशंससेंट्रल ट्रेड यूनियनों तथा स्वतंत्र फेडरेशनों/यूनियनों के संयुक्त समन्वय समिति
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महाराष्ट्र स्टेट बैंक एम्पलॉयी फेडरेशन का त्रैवार्षिक सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न

पूरे भारत में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की हड़ताल के लिए मंच तैयार

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एआईबीईएमहाराष्ट्र स्टेट बैंक एम्पलॉयी फेडरेशनसम्मेलन
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श्रम संहिताओं के खिलाफ केरल में एकजुट संघर्ष तेज तिरुवनंतपुरम में लेबर कॉन्क्लेव, श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस रणनीति पर मंथन

श्रम संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राज्यों को अधिकार है कि वे श्रमिकों के हित में कानून बनाएं। इस संदर्भ में राज्य सरकार से आग्रह किया गया कि विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर केंद्र सरकार से श्रम संहिताओं की वापसी की मांग की जाए तथा श्रमिक हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक विधायी पहल की जाए।

केरलएटकश्रम संहिता
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मनरेगा को कमजोर करने के खिलाफ दिल्ली में वाम दलों का व्यापक विरोध ‘विकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम–2025’ वापस लेने की मांग

केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम–2025’ कर दिया है और इसके प्रावधानों में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे यह योजना धीरे-धीरे समाप्ति की ओर धकेली जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कदम ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला है।

वीबी जी राम जीविकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम–2025’मनरेगा
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और सेक्टरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों ने चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने तक संघर्ष को चरणबद्ध रूप से तेज़ करने का लिया संकल्प

9 दिसंबर 2025 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और विभिन्न सेक्टरल फेडरेशनएसोसिएशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच द्वारा प्रेस को निम्न बयान जारी किया गया।

INTUCAITUCHMS
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चार श्रम संहिताएँ नौकरी की सुरक्षा को खत्म कर रही हैं

भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशें, विश्व स्वस्थ्य संगठन के दिशानिर्देश, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, विशेषज्ञ वेतन समितियों के निर्णय- सभी को नजरअंदाज किया जा रहा है। न्यूनतम वेतन गणना का आधार भी परिभाषित नहीं है, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल हैं। ठेका और आउटसोर्सिंग क्षेत्र के मालिकों की भविष्य में जवाबदेही संदिग्ध है। अप्रेंटिस रखकर स्टाइपेंड देकर सस्ते में काम लिया जाएगा।

4 लेबर कोड4 श्रम संहिताAITUC
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Nationwide Massive Protests Against Four Labour Codes and Anti-Farmer Policies

Central trade unions and the Samyukt Kisan Morcha organised massive nationwide protests in more than 500 districts demanding withdrawal of the four labour codes and reversal of anti-farmer policies. Protesters accused the government of attacking workers’ rights, promoting contractorisation, ignoring unemployment, pushing privatisation and suppressing labour laws. They criticised rising prices, joblessness and growing inequality, calling for filling vacant posts, job creation, strengthening social security and defending constitutional rights.

Labour Policy4 Labour LawAnti farmar policy
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26 नवंबर को 4 लेबर कोड के खिलाफ सशक्त विरोध और अवज्ञा का आह्वान

4 श्रम संहिताओं को लागू करना देश के मेहनतकश लोगों को धोखा देना : केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच

#Unions calls to resist 4 labour codes#Unions calls to withdraw 4 labour codes#DEFIANCE ON 26TH NOVEMBER