हैदराबाद: हैदराबाद के लिबर्टी क्रॉस रोड पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के सामने शुक्रवार को विभिन्न वाम दलों, जन संगठनों, बुद्धिजीवियों, नागरिक अधिकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में एकत्र होकर प्रदर्शन किया। ‘फर्जी मुठभेड़ विरोधी समिति’ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में मुख्य मांग थी, फर्जी मुठभेड़ें तुरंत बंद की जाएं, छत्तीसगढ़ में चल रहा ‘कागार ऑपरेशन’ समाप्त किया जाए और जंगलों की संपदा की लूट रोककर शांति वार्ता शुरू की जाए।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तेलंगाना राज्य सचिव एवं विधायक कुनमनेनी संबशिव राव ने कहा कि देश में मानव नरसंहार हो रहा है, लेकिन न्याय के सर्वोच्च आसन (सुप्रीम कोर्ट) की चुप्पी सबसे ज्यादा चिंताजनक है। सुप्रीम कोर्ट को इस गंभीर मुद्दे को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और व्यापक एवं निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। केंद्र सरकार को कागार ऑपरेशन तुरंत बंद करना चाहिए और शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए। अमित शाह और मोदी बार-बार चुनौती दे रहे हैं कि मार्च 2026 तक सभी माओवादियों का खात्मा कर देंगे। बेहतर होगा कि वे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जैसी समस्याओं को चुनौती मानकर उन्हें खत्म करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तमाम फर्जी मुठभेड़ें दरअसल भाजपा सरकार द्वारा की जा रही हत्याएं हैं। हम जनता की भलाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं। क्या हम देशद्रोही हैं? जबकि अदानी और अंबानी सरकारी संपत्ति, सार्वजनिक धन लूट रहे हैं और देश के खनिज संसाधनों को लूट रहे हैं - क्या वे देशभक्त हैं? कुनमनेनी ने सवाल उठाया।
माओवादियों को मारने से समस्या का समाधान नहीं होगा, उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को हल करना होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन पूरे देश की जनता की आवाज का प्रतिबिंब है। चूंकि हम कागार ऑपरेशन पर सरकार से सवाल कर रहे हैं, इसलिए भाजपा और आरएसएस सोशल मीडिया पर बार-बार धमकी भरे पोस्ट डाल रहे हैं कि संबशिव राव को मार दिया जाएगा।
भाकपा (मार्क्सवादी) के तेलंगाना राज्य सचिव जॉन वेस्ली ने कहा कि माओवादियों की हत्या असंवैधानिक है। सरकार को माओवादियों को मारने का अधिकार किसने दिया? इन हत्याओं की व्यापक जांच होनी चाहिए।
प्रो. कोदंडाराम ने मांग की कि फर्जी मुठभेड़ों में माओवादियों को मारने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।
नागरिक अधिकार नेता प्रो. हरगोपाल ने कहा कि नक्सलियों का यह सामूहिक नरसंहार सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि जंगलों की संपदा को अदानी को सौंपा जा सके। क्या सरकार से सवाल करने वाले सभी लोग शहरी नक्सली हो जाएंगे?
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. चंद्रकुमार ने कहा कि 1600 एकड़ खनिज संपदा वाली जमीन अदानी को मात्र 1 रुपये में बेची गई है। इसलिए वे नक्सलियों को इन जंगलों से हटाना-मारना चाहते हैं। यह अत्यंत अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है।
प्रदर्शन की अध्यक्षता भाकपा के तेलंगाना राज्य सहायक सचिव ईटी नरसिम्हा ने की। इस मौके पर पूर्व सांसद सैयद अजीज पाशा, भाकपा (माले) लिबरेशन के राज्य सचिव रमेश राजा, भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के राज्य सचिव मंडल सदस्य सादिनेनी वेंकटेश्वर राव, चलपति राव (न्यू डेमोक्रेसी), मुरहरी (एसयूसीआई-सी), पोटू रंगा राव (भाकपा-माले मास लाइन), संध्या (पीओडब्ल्यू), भास्कर (चंद्रन्ना ग्रुप, भाकपा-माले), प्रो. लक्ष्मण, गोवर्धन (न्यू डेमोक्रेसी), एटक के राज्य उप महासचिव एम. नरसिम्हा, एटक के राज्य सचिव बी. वेंकटेशम, पल्ला नरसिम्हा रेड्डी, बी. चाया देवी (भाकपा राज्य कार्यकारिणी सदस्य), नेदुनूरी ज्योति (भारतीय महिला फ़ैडरेशन), कल्लूरी धर्मेंद्र (अखिल भारतीय नौजवान सभा), अंजय्या नायक (राज्य गिरिजन संघ) आदि उपस्थित रहे।





