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ट्रेड यूनियनों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी निंदनीय

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आर्थिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास

डॉ. गिरीश

लखनऊ/नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एक समाचार पत्र के कार्यक्रम में दिए गए उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें उन्होंने उद्योगों के बंद होने के लिए ट्रेड यूनियनों और मजदूर वर्ग को जिम्मेदार ठहराया था । भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीश ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री ने इस बयान के जरिए न केवल ट्रेड यूनियनों और मजदूर वर्ग का अपमान किया है, बल्कि अपनी सरकार व व्यवस्था की जिम्मेदारियों से भी पल्ला झाड़ लिया है ।

भाकपा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मुख्यमंत्री हमेशा से मजदूर विरोधी रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में सरकार नोएडा, दिल्ली, मानेसर और बरौनी जैसे देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में स्वतःस्फूर्त रूप से फूटे मजदूर आंदोलनों से भयभीत है। सरकार ने पहले इन आंदोलनों को कुचलने के लिए दमन चक्र चलाया, सैकड़ों मजदूरों को जेल भेजा और अब उनके खिलाफ घृणास्पद दुष्प्रचार पर उतर आई है।

भाकपा राष्ट्रीय सचिव ने स्पष्ट किया कि कोई भी उद्योग ट्रेड यूनियनों के कारण नहीं, बल्कि सरकार और उद्योगपतियों की अपनी गलत नीतियों व कुप्रबंधन की वजह से बंद होता है। उन्होंने कहा कि उद्योगपति बैंकों से कर्ज लेकर और टैक्स चोरी कर उद्योगों को खोखला कर देते हैं और फिर सरकार की मदद से उन्हें बंद कर निकल जाते हैं। इसके बाद उन उद्योगों की जमीनों पर कॉलोनाइजेशन (रियल एस्टेट) के जरिए अरबों रुपये कमाए जाते हैं। 1991 में नई आर्थिक नीतियों के आने के बाद से यह प्रक्रिया और तेज हुई है, जिसने मजदूरों को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया है।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए डॉ. गिरीश ने कहा कि औद्योगिक शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए लंबे संघर्षों के बाद मजदूरों को ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार मिला था। भारत में वर्ष 1926 के कानून और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत ट्रेड यूनियन बनाना एक मौलिक अधिकार है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है।

ट्रेड यूनियनों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में जिस कानपुर का उदाहरण दिया, वहां की सच्चाई यह है कि रिलायंस टेक्सटाइल उद्योग को बाजार देने के लिए केंद्र सरकार ने एनटीसी और बीआईसी की मिलों को बंद करवाया था। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उन कंपनियों को पूरी तरह बंद कर उनकी बेशकीमती जमीनों को रियल एस्टेट कारोबारियों को बेच दिया। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, वर्तमान एनडीए सरकार के कार्यकाल में भी मंदी, नोटबंदी, त्रुटिपूर्ण जीएसटी और चहेते कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की नीतियों के चलते देश में लाखों उद्योग बंद हुए हैं।

बयान में राज्य सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश में मजदूर आज आधुनिक बंधुआ प्रथा में काम करने को मजबूर हैं। सरकार ने कारखाना अधिनियम में संशोधन कर काम के घंटे बढ़ाकर 12 कर दिए हैं और नए लेबर कोड के जरिए उनके न्यूनतम वेतन व सामाजिक सुरक्षा के अधिकार छीन लिए हैं। राज्य सरकार ने पिछले 12 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन (संशोधन) नहीं किया था, जिसे सरकार ने खुद 17 अप्रैल 2026 को जारी अपनी अधिसूचना में स्वीकार किया है।

मुख्यमंत्री ने नोएडा श्रमिक आंदोलन के दौरान मई महीने में न्यूनतम मजदूरी के लिए 'वेज बोर्ड' गठित करने, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने और आउटसोर्सिंग कर्मियों का वेतन बढ़ाने का वादा किया था, जो आज तक अधूरा है। भाकपा ने ट्रेड यूनियनों के इस रुख का पूरी तरह समर्थन करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री का बयान असल नीतिगत और आर्थिक विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का एक प्रयास मात्र है, जिस पर राज्य सरकार को तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।

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