सभी वामपंथी दल भाजपा और अन्य हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मदुरै जिले के तिरुप्परंकुन्द्रम पहाड़ी पर स्थित धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद खड़ा करके तमिलनाडु में सांप्रदायिक तनाव भड़काने और राजनीतिक लाभ लेने की नापाक कोशिशों की कड़ी निंदा करते हैं।
तिरुप्परंकुन्द्रम पहाड़ी पर तीन मंदिर, एक दरगाह और कई प्राचीन जैन गुफाएं हैं। सदियों से यह पहाड़ी सांप्रदायिक सौहार्द और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक रही है। विभिन्न धर्मों के लोग यहां आपसी सम्मान के साथ अपनी धार्मिक प्रथाएं करते आए हैं और अलग-अलग समुदाय शांतिपूर्वक साथ रहते आए हैं।
लेकिन तमिलनाडु में राजनीतिक फायदा उठाने के इरादे से भाजपा नेताओं ने इसी साल फरवरी में इस स्थान को “दक्षिण का अयोध्या” बताकर बाहर से लोगों को लाया और सांप्रदायिक दंगा भड़काने की कोशिश की। सोशल मीडिया के जरिए भी उन्होंने माहौल खराब करने और फूट डालने का काम किया।
अब दिसंबर में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व के अदालती फैसलों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम को नजरअंदाज करते हुए याचिकाकर्ता को सिकंदर बादशाह दरगाह के पास ब्रिटिश काल के एक सर्वे स्तंभ पर ‘कार्तिगई दीपम’ जलाने की अनुमति दे दी है। इससे सांप्रदायिक ताकतों को खुला मौका मिल गया है। एकल जज बेंच ने राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन के विरोध को दरकिनार करते हुए याचिकाकर्ता को इस कार्य के लिए सीआईएसएफ सुरक्षा तक लेने की इजाजत दे दी। ये आदेश न केवल पहले के फैसलों की अवहेलना करते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था के मामले में राज्य सरकार के अधिकार को कुचलकर संविधान की संघीय भावना का भी उल्लंघन करते हैं।
वामपंथी दल मदुरै और तमिलनाडु की जनता की सराहना करते हैं, जिन्होंने सांप्रदायिक नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुटता दिखाई और राज्य की बहुलतावादी परंपराओं को कायम रखते हुए सांप्रदायिक तत्वों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस मामले को दृढ़ता से संभालने में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार का रुख सराहनीय रहा है। इस मुद्दे पर अन्नाद्रमुक जैसे दलों द्वारा सांप्रदायिक तत्वों का समर्थन करना निंदनीय है।
हम मदुरै सांसद सु. वेंकटेशन पर हमले और हिंदुत्व संगठनों द्वारा दी गई जान से मारने की धमकियों की भी कड़ी निंदा करते हैं।
वामपंथी दल देश के सभी लोकतंत्रवादी और धर्मनिरपेक्ष लोगों से अपील करते हैं कि वे संघ परिवार की उस सांप्रदायिक राजनीति को पूरी तरह खारिज करें, जो मोदी सरकार द्वारा जनता की आजीविका और संवैधानिक अधिकारों पर जारी हमलों से ध्यान हटाने का षड्यंत्र कर रही है।





