हम वेनेज़ुएला के खिलाफ अमेरिकी आक्रमण तथा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के अपहरण की कड़ी निंदा करते हैं। यह एक संप्रभु राष्ट्र के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए किया गया हमला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि वे वेनेज़ुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करेंगे, जिससे इस आक्रमण के पीछे की वास्तविक मंशा स्पष्ट हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक कदम आगे बढ़कर चेतावनी दी कि क्यूबा और मेक्सिको उनके अगले निशाने होंगे। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 जारी होने के कुछ दिनों बाद आए ये बयान स्पष्ट करते हैं कि अमेरिकी साम्राज्यवाद सैन्य हमलों के जरिए भी पूरी दुनिया पर अपना आधिपत्य थोपना चाहता है। अमेरिका कुख्यात मुनरो सिद्धांत के ट्रंप संस्करण को लागू करना चाहता है, जो पूरे पश्चिमी गोलार्ध को अपना पिछवाड़ा मानता है और वहां अपनी मनमानी चलाना चाहता है।
वेनेज़ुएला से आ रही खबरें बताती हैं कि लोग बड़ी संख्या में अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ और अपने देश की संप्रभुता की रक्षा में जुट रहे हैं। हम वेनेज़ुएला के संघर्षशील लोगों के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता और समर्थन व्यक्त करते हैं।
हम वाम दल अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों का आह्वान करते हैं और लैटिन अमेरिका के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं। हम अपने देश के सभी शांतिप्रिय, साम्राज्यवाद-विरोधी लोगों से अपील करते हैं कि बड़ी संख्या में जुटें और इन प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लें। भारत सरकार को दुनिया भर के देशों की उन आवाजों में शामिल होना चाहिए जो अमेरिकी आक्रमण की निंदा कर रही हैं और वेनेज़ुएला के साथ दृढ़ता से खड़ी हों।
बयान जारी करने वाले वाम दलों में डी. राजा (महासचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी), एम.ए. बेबी (महासचिव, भाकपा (मार्क्सवादी), दीपांकर भट्टाचार्य (महासचिव, भाकपा (माले)-लिबरेशन), जी. देवराजन (महासचिव, एआईएफ़बी), मनोज भट्टाचार्य (महासचिव, आरएसपी)





