रामनरसिम्हा राव
अनंतपुर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी स्थापना समारोह कार्यक्रम गुरुवार को अनंतपुर के ललित काला परिषद में आयोजित हुआ जिसमें मुख्य अतिथि भाकपा महासचिव डी. राजा थे। उक्त कार्यक्रम में 250 कम्युनिस्ट शहीदों के परिवारों का सम्मान किया गया। सभा की अध्यक्षता भाकपा के जिला सचिव पालयम नारायणस्वामी ने की। सभा को भाकपा के राष्ट्रीय सचिव के. रामकृष्ण, आंध्र प्रदेश राज्य सचिव गुज्जुला ईश्वरैया, राज्य सचिवालय सदस्य डी. जगदीश, राज्य कार्यकारी सदस्य सी. जफर ने भी संबोधित किया। सभा में मल्लिकार्जुन और राजा रेड्डी आदि भी उपस्थित थे।

डी. राजा ने संबोधित करते हुए सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को फासीवाद के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया उन्होने याद दिलाया कि जब नीलम राजशेखर रेड्डी राष्ट्रीय सचिव थे, तब वे स्वयं एक पार्टी सिद्धांतकार के रूप में अनंतपुर अक्सर आया करते थे। कम्युनिस्ट नेताओं ने जनता के कल्याण के लिए अपनी हर चीज और अपनी जान तक कुर्बान कर दी। कांग्रेस और कम्युनिस्टों ने मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। कई लोग जेल गए और यातनाएं सहनी पड़ीं। कुछ कम्युनिस्टों को फांसी पर भी चढ़ाया गया। पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी ही थी। इसने ही नए स्वतंत्र भारत के लिए संविधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

मोदी शासन पर बोलते हुए राजा ने कहा कि भारतीय इतिहास में संसद के कार्य दिवसों की संख्या बहुत कम रही है। हालांकि भाकपा और आरएसएस दोनों की स्थापना 1925 में हुई थी, लेकिन आरएसएस ने राष्ट्रीय मुख्यधारा के खिलाफ काम किया और वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का समर्थन किया। जो कम्युनिस्ट और कांग्रेस उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़े, वे सत्ता में नहीं हैं, जबकि जो उपनिवेशवाद का समर्थन करते थे, वे सत्ता में हैं। भाजपा और आरएसएस गांधीजी के बारे में बार-बार बोलते हैं, लेकिन उनके कैडर गोडसे की पूजा करते हैं, जिसने महात्मा गांधी की हत्या की थी। हमें शहीदों और पुराने योद्धाओं द्वारा छेड़ी गई पिछली लड़ाइयों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने यह भी इंगित किया कि गांधीजी सभी धर्मों की समानता और भाईचारे का उपदेश देते थे। भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. अंबेडकर स्वतंत्रता, भाईचारा और समानता की बात करते थे। लेकिन वर्तमान सत्ताधारी वर्ग संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद शब्दों को हटाने का हर प्रयास कर रहा है। वे धर्मनिरपेक्ष भारत को हिंदू राष्ट्र में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आंध्रप्रदेश और बिहार के लोगों को यह सवाल करना चाहिए कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार एक सांप्रदायिक पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन क्यों कर रहे हैं। आंध्र के लोग विशाखापट्टनम स्टील प्लांट के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। मोदी सरकार की नीतियां मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों और अन्य मेहनतकश वर्गों के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि अदानी और अंबानी को रियायतें देने और सरकारी संपत्तियां सौंपने के पक्ष में हैं। लेकिन कम्युनिस्ट कभी सांप्रदायिक कट्टरवादी सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। जब तक शोषण जारी रहेगा, कम्युनिस्ट जीवित रहेंगे और लड़ेंगे।

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव के. रामकृष्ण ने संबोधन करते हुए स्पष्ट किया कि बेघर और भूमिहीन गरीब वर्गों को कम्युनिस्टों द्वारा भूमि संघर्ष छेड़ने के कारण जमीनें मिलीं। तेलंगाना सशस्त्र गौरवशाली ऐतिहासिक संघर्ष में 4500 कम्युनिस्टों ने अपनी जान कुर्बान की और दस लाख एकड़ उपजाऊ भूमि वितरित की। अनंतपुर जिले में नीलम राजशेखर रेड्डी, इडुकल्लू सदाशिवन, वीके आदिनारायण रेड्डी, तारिमेला नागी रेड्डी, गुट्टी रामकृष्ण, वेंगमा नायडू आदि वे दिग्गज थे जिन्होंने कई जन संघर्षों का नेतृत्व किया। रामकृष्ण ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने को तैयार होने के बावजूद उन्हें मारना अधिक अनैतिक है।
आंध्र प्रदेश राज्य सचिव गुज्जुला ईश्वरैया ने संबोधन करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि शहीदों और दिग्गजों के पदचिह्नों पर चलें और फासीवादी सांप्रदायिक कट्टरवादी ताकतों के खिलाफ संघर्षों का नेतृत्व करें। उन्होंने यह भी अपील की कि हमें वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में विकसित होना होगा।





