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स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ भाकपा नेता आर. नल्लकन्नु का चेन्नई में निधन

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उपराष्ट्रपति-राज्यपाल सहित विभिन्न राजनीतिक दल सामाजिक कार्यकर्ता और फिल्मी सितारों ने दी श्रद्धांजलि ! राजकीय सम्मान के साथ किया विदा ! तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पूरे समय रहे मौजूद !

चेन्नई, 26 फरवरी: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता सेनानी कॉमरेड आर. नल्लकन्नु (101 वर्ष) का निधन हो गया है। उनका निधन 25 फरवरी को शाम को चेन्नई में हुआ। कडथिरिप्पु थिरुप्पट्टु वीरन से संबंधित, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता नल्लकन्नु, तमिलनाडु में कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर किसानों, मजदूरों और दलितों के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया। मुख्यमंत्री ने कहा उनके पार्थिव शरीर पर अंतिम सम्मान के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण राजकीय सम्मान दिया जाएगा। अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री स्टालिन, उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और अन्य नेता शामिल हुए।

नल्लकन्नु के निधन पर राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन : सार्वजनिक जीवन में तनिक भी स्वार्थ न रखते हुए केवल समाज के लिए जीने वाले महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी तथा भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के अग्रदूत, आदरणीय श्री नल्लाकन्नू जी के निधन का समाचार सुनकर मुझे गहरा और असहनीय दुःख हुआ है। श्रमिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और वंचितों के उत्थान के लिए अपने पूरे जीवन को समर्पित करने वाले संघर्षशील योद्धा थे श्री नल्लाकन्नू जी। सादगी, ईमानदारी, त्याग और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे सभी के द्वारा सम्मानित महान व्यक्तित्व थे। उनका निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से शोकाकुल परिवारजनों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथियों तथा तमिलनाडु के समस्त नागरिकों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। उनका त्याग और संघर्ष से परिपूर्ण जीवन सदैव जनता के हृदय में अमर रहेगा।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (डीएमके): “कम्युनिस्ट आंदोलन के अटूट स्तंभ और तमिलनाडु की प्रगतिशील राजनीति के महान योद्धा। उनका पूरा जीवन जनता के लिए समर्पित था। उनकी मृत्यु अपूरणीय क्षति है। उनके परिवार, साथियों और लाखों प्रशंसकों को मेरी गहरी संवेदना। राज्य की ओर से पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।”

राज्यपाल आर.एन. रवि: दिग्गज राजनीतिक नेता नल्लाकन्नू का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपना जीवन सादगी और दृढ़ समर्पण के साथ जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके निधन से एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है जिसे गहराई से महसूस किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: “कम्युनिस्ट नेता और स्वतंत्रता सेनानी आर. नल्लकण्णु जी का निधन दुखद है। उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर गरीबों, मजदूरों और किसानों की आवाज बुलंद की। उनकी सादगी और सेवा भावना याद की जाएगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।”

राहुल गांधी (कांग्रेस): “लगभग नौ दशकों तक उन्होंने न्याय और गरिमा के लिए अटल रहकर संघर्ष किया। मेरी हार्दिक संवेदना उनके परिवार, साथियों और असंख्य प्रशंसकों को।”

मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष): “वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता के निधन पर गहरा दुख। उनके परिवार और साथियों को संवेदना।”

उद्धयनिधि स्टालिन (उप मुख्यमंत्री): “एक महान नेता और जनसेवक का जाना तमिलनाडु के लिए बड़ा नुकसान।”

एडाप्पडी पलानीसामी (अन्नाद्रमुक): पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का अपार स्नेह प्राप्त करने वाले और सभी के साथ प्यार व स्नेह से पेश आने वाले नल्लाकन्नू ने मजदूरों की जायज मांगों को पूरा करने के लिए कई सफल आंदोलन किए। अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए जीने वाले महान व्यक्तित्व नल्लाकन्नू के निधन से दुखी उनके परिवार, भाकपा सदस्यों और मजदूरों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।

ओ. पन्नीरसेल्वम (पूर्व मुख्यमंत्री): नल्लाकन्नू सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे। लोगों की सेवा को ही अपना पेशा मानने वाले इस नेता की जगह अब कोई नहीं ले सकता। देश ने एक महान राष्ट्रवादी और कम्युनिस्ट नेता खो दिया है।

के. सेल्वापेरुन्थागई (कांग्रेस): 15 वर्ष की आयु से लेकर जीवन भर नल्लाकन्नू ने मजदूरों, किसानों और दलित समुदायों सहित सभी के अधिकारों और उत्थान के लिए अथक संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की। जातिगत भेदभाव, अत्याचार और ऑनर किलिंग के खिलाफ अपनी आखिरी सांस तक लड़ने वाले नल्लाकन्नू का निधन तमिलनाडु की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।

पी. षणमुगम, भाकपा (मा): नल्लाकन्नू ने उत्पीड़ित लोगों, किसानों और मजदूरों के कल्याण के लिए काम किया, और जातिवादी व सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर तमिलनाडु में वामपंथी एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रामदास (पीएमके): नल्लाकन्नू सादगी का दूसरा नाम थे। उनका पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी और सामाजिक न्याय के संघर्ष के रूप में पहचाना गया। वे न केवल स्वभाव से सौम्य थे, बल्कि उनकी आवाज भी सौम्य थी। लेकिन उनका पूरा जुझारूपन किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए गूंजता था।

वाइको (एमडीएमके): नल्लाकन्नू ने लोगों की समस्याओं पर बिना किसी समझौते के अपनी आवाज उठाई और संघर्ष किया। वे मजदूर वर्ग के अधिकारों की आवाज को बुलंद करने वाले संघर्षों के नायक थे। जाति और धर्म की सीमाओं से परे मानवीय भावना के साथ सार्वजनिक जीवन में सेवा करने वाले इस त्याग की लौ, नल्लाकन्नू को वीर सलामी।

अंबुमणि रामदास (पीएमके): कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को कितनी सादगी से जीना चाहिए, नल्लाकन्नू इसके एक बेहतरीन उदाहरण थे। उन्होंने अपना जीवन निचले तबके के लोगों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। त्याग की मिसाल रहे इस नेता का सभी दलों द्वारा सम्मान किया जाता था।

थोल. तिरुमावलवन (वीसीके): चुनावी राजनीति के मैदान में नल्लाकन्नू जैसे पवित्र और महान व्यक्तित्व अब कब मिलेंगे, बस यही लालसा बची है। उनके निधन से राजनीतिक क्षेत्र में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे समय भी नहीं भर सकता। केंद्र सरकार को उन्हें 'भारत रत्न' पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिए।

जी.के. वासन (टीएमसी): भारत के दिग्गज राजनीतिक नेता नल्लाकन्नू ने अपनी अंतिम सांस तक सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और पवित्रता का पालन किया। उनकी जनसेवा तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगी। लोगों के लिए कई बार जेल जाने वाले इस नेता का नाम और यश हमेशा कायम रहेगा।

टीटीवी दिनाकरण (एएमएमके): सार्वजनिक जीवन में त्याग, सेवा, ईमानदारी और सादगी की मिसाल थे नल्लाकन्नू। वे उत्पीड़ित लोगों और किसानों के विकास के लिए जीवन भर समर्पित रहने वाले सादगी के शिखर थे। उनका निधन पूरे भारत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।

प्रेमलता विजयकांत (डीएमडीके): नल्लाकन्नू ने जीवन भर सादगी अपनाई और खुद को रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से परे एक ईमानदार राजनेता के रूप में स्थापित किया।

कमल हासन (एमएनएम): गरीब, आम लोगों, मजदूरों और किसानों के कल्याण के लिए 80 वर्षों तक बिना थके मैदान में डटे रहे नल्लाकन्नू। वे ईमानदारी, पवित्रता और सादगीपूर्ण राजनीति के प्रकाश स्तंभ थे।

सीमान (एनटीके): अपनी कथनी और करनी में कोई अंतर न रखते हुए साधारण जीवन जीने वाले एक सच्चे कम्युनिस्ट थे नल्लाकन्नू। उनका निधन न केवल तमिल भूमि और लोगों के लिए, बल्कि स्वच्छ राजनीति और बेदाग सार्वजनिक जीवन के लिए भी एक बहुत बड़ी क्षति है।

कृष्णासामी (पुथिया तमिलगम): नल्लाकन्नू जीवन भर अपने आदर्श मार्ग से भटके बिना लगातार जनसेवा करते रहे। सभी मजदूर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते थे जो उन्हें उनके अधिकार वापस दिलाएगा।

एम.एच. जवाहिरुल्ला (एमएमके): नल्लाकन्नू स्वतंत्रता संग्राम के जीवित गवाह, किसानों और मजदूरों के अडिग स्तंभ और कम्युनिस्ट आंदोलन के अग्रदूत थे। उनकी यादें और उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग हमेशा जन आंदोलनों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

विजय (टीवीके): किसानों और लोगों के अधिकारों के लिए अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिताने वाले योद्धा थे नल्लाकन्नू। उनका निधन इस देश और कम्युनिस्ट आंदोलन के साथियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

कुंद्रकुडी पोन्नंबला अडिगलर: एक कम्युनिस्ट योद्धा की सदी भर की यात्रा आज रुक गई है। जिनकी कथनी, सांस, विचार और कार्य समाज के अंतिम व्यक्ति और मजदूर वर्ग के जीवन के लिए समर्पित थे, गरीबों के वे नेता चले गए। एक कार्यकर्ता के लिए कार्यकर्ता, एक नेता के लिए नेता और एक साथी के लिए साथी बने रहने वाले इस महान इंसान से अब हम दोबारा कब मिलेंगे? उनका यश अमर रहे। उनका योगदान इतिहास में हमेशा कायम रहेगा। उनकी उस सेवा के लिए हम उन्हें नमन करते हैं।

अन्य नेता:

एल. मुरुगन (केंद्रीय मंत्री, भाजपा)

एन. नैनार नागेंद्रन (भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष)

के. सेल्वापेरुन्थगई (टीएनसीसी अध्यक्ष)

सभी ने गहरा शोक व्यक्त किया और उनकी सादगी, त्याग और जनसेवा की प्रशंसा की।

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