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अजय भवन में मनाया डॉ. अंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस

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डॉ. अंबेडकर ने ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा की कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश के लिए विघटनकारी और आधुनिक लोकतांत्रिक भारत के लिए अनुपयुक्त बताया। ‘हिंदू राष्ट्र’ थोपने की कोई भी कोशिश इस देश को बर्बाद कर देगी- डी. राजा

नई दिल्ली, 6 दिसंबर :भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राष्ट्रीय मुख्यालय अजय भवन में आज डॉ. भीमराव अंबेडकर के 69वें परिनिर्वाण दिवस को श्रद्धांजलि के साथ मनाया गया। मुख्यालय में कार्यरत साथियों और दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं ने डॉ. आंबेडकर की तस्वीर के समक्ष एकत्र होकर पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव मंडल के सदस्य डॉ. गिरीश शर्मा, पी. संदोश कुमार एमपी, रावुला वेंकैया, गुलजार सिंह गोरिया, कृष्णा झा तथा अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

संविधान की प्रस्तावना का पाठ करते हुए

पीएचक्यू शाखा के सचिव अनिल राजिमवाले ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

डी. राजा ने सबसे पहले पुष्पांजलि अर्पित की। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भाकपा भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए यह दिवस मना रही है। वे संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने संविधान के सांप्रदायीकरण के हर प्रयास का विरोध किया। उन्होंने ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा की कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश के लिए विघटनकारी और आधुनिक लोकतांत्रिक भारत के लिए अनुपयुक्त बताया। उन्होंने कहा कि ‘हिंदू राष्ट्र’ थोपने की कोई भी कोशिश इस देश को बर्बाद कर देगी। वे हिंदू-मुस्लिम के बीच किसी भी तरह के विभाजन और आपसी लड़ाई के सख्त खिलाफ थे।

क्रमशः किसान सभा महासचिव आर. वेंकैया , भाकपा राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीश शर्मा और भाकपा महासचिव डी. राजा

डॉ. अंबेडकर ने लोकतंत्र, समानता, गणतंत्र और धर्मनिरपेक्षता जैसे आधुनिक विचारों को पेश किया और उन्हें लागू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सभी धर्मों की एकता का समर्थन किया। उन्होंने वर्ग हो या जाति, हर तरह के शोषण और विभाजनकारी ताकतों का डटकर मुकाबला किया।

राजा ने कहा कि आज की मौजूदा सरकार श्रमिक वर्ग और मेहनतकश लोगों की सारी उपलब्धियों को नष्ट करने पर तुली है। वह दमनकारी ‘श्रम संहिताएं’ लाकर काम के घंटे 12 घंटे या उससे ज्यादा कर रही है और मजदूरों के सारे अधिकार छीन रही है। आज ये लोग हमारे लोकतांत्रिक संविधान के सभी मूल सिद्धांतों का विरोध करके चुपके-चुपके उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

राजा ने सभी के साथ मिलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करवाया। अंत में उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की।

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