कोलार गोल्ड फील्ड्स (कर्नाटक) : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कर्नाटक राज्यव्यापी जत्थे का भव्य शुभारंभ आज कोलार गोल्ड फील्ड्स (केजीएफ) से हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

कोलार गोल्ड फील्ड्स (केजीएफ) में कम्युनिस्ट आंदोलन की गौरवशाली विरासत है। केजीएफ की जनता ने 1952 में हुए सबसे पहले विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लोकप्रिय नेता के.एस. वासन् को अपना प्रतिनिधि चुना था। 1957 में एक अन्य लोकप्रिय नेता एम.सी. नरसिम्हन इस जगह से विधायक चुने गए थे। सोने की खदानों के मजदूरों ने कम्युनिस्ट आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े रहे। ऐसी ही एक क्रांतिकारी जगह से, पार्टी की शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में भाकपा कर्नाटक राज्यव्यापी जत्था का उद्घाटन भाकपा महासचिव डी. राजा ने 30 नवंबर 2025 को किया। डी. राजा ने उसी स्थान पर पार्टी का झंडा फहराया जहां 1955 में लोकप्रिय नेता जीवनानंदम ने केजीएफ की जनता को संबोधित किया था। गिल्बर्ट्स इलाके में एक और झंडा-स्तंभ का उद्घाटन किया गया और वहां भी झंडा फहराया गया।

जत्था उद्घाटन जनसभा किंग जॉर्ज ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। जनसभा की अध्यक्षता भाकपा कोलार जिला सचिव ज्योति बसु ने की। इस सभा में भाकपा राज्य सचिव साथी सुंदरेश, भाकपा(एम) राज्य सचिव प्रकाश, भाकपा तमिलनाडु राज्य कार्यकारिणी सदस्य टी. रामचंद्रन (विधायक), भाकपा कर्नाटक राज्य सहायक सचिव संतोष एवं रघु, सचिव मंडल सदस्य डॉ. के.एस. जनार्दन, रामकृष्ण, एआईवाईएफ राष्ट्रीय सचिव हरीश बाला, कांग्रेस राज्य महासचिव कार्तिक, डीएमके कोलार जिला सचिव अरिवझगन, वीसीके राज्य सचिव मूर्ति, एमडीएमके कर्नाटक प्रभारी जयशंकर तथा विभिन्न प्रगतिशील संगठनों के अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए।
अपने उद्घाटन भाषण में डी. राजा ने कहा, “मैंने केजीएफ में डॉ. आंबेडकर की कई मूर्तियां देखीं। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पी हैं। हिंदुत्व के आधार पर भारत को धर्मतंत्र बनाने के विभिन्न दबावों के बावजूद उन्होंने दृढ़ता से देश को धर्मनिरपेक्ष बनाने का काम किया।” उन्होंने आगे कहा, “अब धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के विचार के खिलाफ भाजपा-आरएसएस देश पर शासन कर रही है और भाजपा-आरएसएस गठजोड़ को हराकर संविधान तथा देश की रक्षा करना हर भारतीय का कर्तव्य है।” उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष और पुडुचेरी मुक्ति आंदोलन में भाकपा की भूमिका को भी याद किया।
भाकपा राज्य सचिव साथी सुंदरेश ने कहा, “केजीएफ ने पार्टी को पहला विधायक दिया था। अब पार्टी को पुनर्जीवित करने और कर्नाटक विधानसभा में आवाज़हीनों की आवाज़ बनने का समय है। पार्टी महाधिवेशन ने जनता से फिर जुड़ने का आह्वान किया है और यह जत्था उसी दिशा में एक प्रयास होगा।”
30 नवंबर से शुरू हुआ यह जत्था कर्नाटक के सभी जिलों से गुजरेगा और 23 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु में समाप्त होगा। जत्था का उद्देश्य केवल भाकपा के इतिहास को याद दिलाना ही नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी की ऐतिहासिक आवश्यकता को भी रेखांकित करते हुए मजदूरों, किसानों, दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों तथा समाज के सभी वर्गों से जुड़ना है।





