नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा ने महिला आरक्षण, परिसीमन और संसदीय नियमों के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह महिला आरक्षण को ढाल बनाकर देश के राजनीतिक भूगोल को बदलने और सत्ता का केंद्रीकरण करने की नापाक साजिश रच रही है।
भाकपा महासचिव ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण कम्युनिस्ट आंदोलन की गौरवशाली विरासत है और हमेशा रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि इसकी मांग सबसे पहले 1960 के दशक में भाकपा सांसद रेणु चक्रवर्ती ने की थी और बाद में 90 के दशक में कॉमरेड गीता मुखर्जी के अथक एवं ऐतिहासिक प्रयासों से इसे आकार मिला। डी. राजा ने कहा कि 2023 में पारित हुआ विधेयक उसी लंबे संघर्ष को दर्शाता है, लेकिन कपटी मोदी सरकार ने जानबूझकर इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को अनिश्चित बना दिया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अभी भी जनगणना, जातिगत गणना या भविष्य के परिसीमन के आधार को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, जिसे अब संवैधानिक संशोधन को दरकिनार करते हुए केवल साधारण संसदीय बहुमत से तय किया जाना है।
संसदीय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए डी. राजा ने कहा कि स्थिति इससे भी बदतर है, क्योंकि परिसीमन विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 और संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को एक साथ धकेलने के लिए नियम 66 के निलंबन की मांग करके सरकार संसद पर अनुचित दबाव बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की रणनीति ऐसी है कि इस भयावह और संघवाद-विरोधी परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ पड़ने वाले किसी भी वोट को महिला आरक्षण के खिलाफ वोट के रूप में पेश किया जा सके।
भाजपा की इस नीति को एक 'नापाक राजनीतिक साजिश' करार देते हुए भाकपा महासचिव ने कहा कि सत्ताधारी दल भारत के राजनीतिक भूगोल को बदलने और सत्ता को केंद्रित करने के लिए महिला आरक्षण का एक आवरण (स्मोकस्क्रीन) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप दक्षिणी राज्यों, छोटे उत्तरी राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने देश की जनता से अपील की है कि वे इस साजिश के पार देखें और सच्चाई को पहचानें।
डी. राजा ने अपने बयान के अंत में सरकार को पूरी तरह से महिला-विरोधी बताते हुए कहा कि जो सरकार एक दशक तक महिला आरक्षण को रोके रही, कानून में इसे कमजोर किया और अब अपने एजेंडे को जबरन लागू करने के लिए संसदीय नियमों में हेरफेर कर रही है, वह महिलाओं की हितैषी नहीं हो सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और महिला कल्याण के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ भेदभाव करना, असल में उन राज्यों और देशभर की महिलाओं के साथ किया जा रहा एक व्यापक भेदभाव है। भाकपा महासचिव ने आह्वान किया है कि इस कदम का कड़ा विरोध किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी जानी चाहिए।





