भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर दौरा केरल के प्रति भाजपा की केंद्र सरकार के कपटपूर्ण और धोखेबाज रवैये को और अधिक उजागर करता है। उनके हालिया एर्नाकुलम दौरे की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। किसी भी नजरिए से देखा जाए, तो नीति आयोग ने खुद केरल को सभी विकास सूचकांकों में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य माना है।
सामाजिक न्याय, धार्मिक सद्भाव और भाईचारे पर आधारित इस राजनीतिक संस्कृति के प्रति घृणा फैलाने वाली विभाजनकारी शक्तियों में गहरा द्वेष है। वे केरल के उचित हिस्से (फंड) से इनकार कर उसे आर्थिक रूप से दबाने और विकास व कल्याणकारी गतिविधियों में बाधा डालने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं। बिनॉय विश्वम ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र का यह रुख वायनाड के मुंडक्कई और चूरलमाला आपदा के समय अपने सबसे अमानवीय रूप में सामने आया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक कुशल अभिनेता की तरह आए और चले गए, लेकिन उन्होंने केरल के लिए किसी भी सहायता की घोषणा न करने का ही रुख अपनाया। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत के बाद भाजपा हलकों में यह प्रचार किया गया था कि प्रधानमंत्री राज्य के लिए बड़ी परियोजनाओं की घोषणा करेंगे, लेकिन मोदी का तिरुवनंतपुरम दौरा भी खोखला साबित हुआ और उसमें कुछ भी ठोस नहीं था। अब हाल ही में एर्नाकुलम में राजनीतिक भाषण देते हुए भी उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सामान्य उपेक्षापूर्ण रवैये को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। बिनॉय विश्वम ने सवाल किया कि केंद्र सरकार के इस विश्वासघात पर केरल का भाजपा नेतृत्व क्या कहना चाहता है?





