नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक के गिरने को मोदी सरकार के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह संघवाद-विरोधी परिसीमन विधेयक सदन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा है। भाकपा नेता ने इसे महिला आरक्षण की आड़ में भारत के राजनीतिक मानचित्र को फिर से खींचने के मोदी शासन के प्रयास की एक निर्णायक हार बताया है।
भाकपा महासचिव ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने देशवासियों और विशेष रूप से भारत की महिलाओं से अपील की है कि वे भाजपा के इस छल को समझें। डी. राजा ने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार महिला आरक्षण को बाधित करने का प्रयास किया है; पहले इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर, और अब एक घोर संघवाद-विरोधी प्रक्रिया को छिपाने के लिए इसका आवरण के रूप में इस्तेमाल करके। उनके अनुसार, यह सरकार की महिला-विरोधी मंशा और महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की उनकी अनिच्छा को पूरी तरह से उजागर करता है।
संसद में विधेयक के गिरने को एक कड़ा संदेश बताते हुए भाकपा महासचिव ने कहा कि यह विभाजनकारी दक्षिणपंथी ताकतों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे संविधान को कमजोर करने के लिए संसद को हल्के में नहीं ले सकते।
डी. राजा ने सरकार की इस राजनीतिक हार की तुलना ऐतिहासिक किसान आंदोलन से की। उन्होंने कहा कि यह हार किसानों के उस ऐतिहासिक संघर्ष की गूंज है, जिसने सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था। उन्होंने अपने बयान के अंत में विश्वास जताया कि यह क्षण जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा तथा अंततः इस सत्ता को उखाड़ फेंकने का मार्ग प्रशस्त करेगा।





