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अमित शाह का बयान अज्ञानतापूर्ण, इतिहास को 'व्हाट्सएप फॉरवर्ड' के स्तर तक गिरा दिया: भाकपा

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नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा ने लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें शाह ने भाकपा को 'रूसी कम्युनिस्ट पार्टी की शाखा' बताया था। डी. राजा ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे "शर्मनाक रूप से अज्ञानतापूर्ण" करार दिया है। उन्होंने गृह मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके इस बयान ने इतिहास को 'व्हाट्सएप फॉरवर्ड' के स्तर तक गिरा दिया है।

डी. राजा ने स्पष्ट किया कि भाकपा का जन्म 1925 में कानपुर में भारत के अपने उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलन के गर्भ से हुआ था। उन्होंने कहा, "इसे ब्रिटिश राज से लड़ने वाले मजदूरों, किसानों और क्रांतिकारियों ने आकार दिया था। पार्टी की औपचारिक स्थापना से पहले ही, कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों को 'ब्रिटिश राज (क्राउन) के खिलाफ युद्ध छेड़ने' के आरोप में जेलों में डाला जा रहा था।"

भाकपा महासचिव ने कहा कि अनगिनत मुक्ति आंदोलनों की तरह भाकपा ने भी रूसी क्रांति से बौद्धिक प्रेरणा ली थी, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली हमेशा भारतीय यथार्थ से गहराई से जुड़ी रही। उन्होंने याद दिलाया कि इसी कम्युनिस्ट विचारधारा ने भगत सिंह और सूर्य सेन जैसे क्रांतिकारियों, सोहन सिंह भकना जैसे उपनिवेशवाद-विरोधी सेनानी, एम. सिंगारवेलु जैसे श्रमिक नेता, स्वामी सहजानंद सरस्वती जैसे किसान नेता और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जैसे निडर देशभक्तों को जन्म दिया। डी. राजा ने कहा कि भाकपा पर निशाना साधने के अपने इस छिछले प्रयास में अमित शाह ने सर्वोच्च बलिदानों की इस पूरी विरासत का अपमान किया है।

डी. राजा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस की अपनी वैचारिक और संगठनात्मक जड़ें स्पष्ट रूप से विदेशी और परेशान करने वाली रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस नेता बी.एस. मुंजे बेनिटो मुसोलिनी के संपर्क में थे, जबकि एम.एस. गोलवलकर ने एडोल्फ हिटलर की नीतियों की प्रशंसा की थी।

उन्होंने आरएसएस के पहले महासचिव बालाजी हुद्दार का भी जिक्र किया, जो ब्रिटिश शासन के प्रति डॉ. हेडगेवार के 'आज्ञाकारी' रवैये से निराश होकर संघ छोड़कर भाकपा में शामिल हो गए थे। राजा ने तंज कसते हुए कहा, "जब कम्युनिस्ट औपनिवेशिक सत्ता का विरोध करने के कारण प्रतिबंध और दमन झेल रहे थे, तब आरएसएस ब्रिटिश सत्ता के प्रति आज्ञाकारी बना रहा। सेलुलर जेल (काला पानी) की बैरकें कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों से भरी हुई थीं, जबकि दक्षिणपंथी नेता ब्रिटिश पेंशन पर पल रहे थे।"

वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए भाकपा महासचिव ने कहा कि जो लोग आज "विदेशी संपर्कों" की बात करते हैं, वे स्वयं वैश्विक सत्ता केंद्रों और कॉर्पोरेट हितों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक रूप से इज़राइल को अपनी 'पितृभूमि' (फादरलैंड) कहते हैं और भाजपा डोनाल्ड ट्रम्प के 'एपस्टीन वर्ग' की सेवा करती है, तो उनके मुंह से देशभक्ति के उपदेश खोखले लगते हैं।

डी. राजा ने आरोप लगाया कि आरएसएस-भाजपा की राजनीति का असली परिणाम ज़मीनी स्तर पर आदिवासियों का विस्थापन, कॉर्पोरेट तुष्टीकरण, मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है।

बयान के अंत में गृह मंत्री को नसीहत देते हुए डी. राजा ने कहा, "भारत का वामपंथ आज भी लोकतांत्रिक और जनसंघर्षों से जुड़ा हुआ है। इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने से पहले, गृह मंत्री को इसका अध्ययन करना चाहिए। संसद तथ्यों की हकदार है, किसी दुष्प्रचार (प्रोपेगैंडा) की नहीं।"

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