नई दिल्ली: ऑल इंडिया यूथ फ़ैडरेशन (एआईवाईएफ) ने बड़े पैमाने पर हुए पेपर लीक और गंभीर अनियमितताओं के बाद 'नीट-यूजी 2026' परीक्षा रद्द किए जाने की कड़ी निंदा की है। संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि भारी त्याग, दृढ़ संकल्प और आशा के साथ तैयारी करने वाले लाखों छात्रों को एनटीए और मोदी सरकार की पूर्ण विफलता के कारण एक बार फिर से कष्ट सहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
एआईवाईएफ़ ने आरोप लगाया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि निरंतर चल रहे एक दुर्भाग्यपूर्ण सिलसिले का हिस्सा है। बार-बार पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और परीक्षाओं के रद्द होने से वर्तमान शासन के तहत देश की परीक्षा प्रणाली का गहरा संकट उजागर हो गया है। एआईवाईएफ के अनुसार, सरकार ने लगातार छात्रों की आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात किया है और एक ऐसी असमान प्रणाली को बढ़ावा दिया है, जो गरीब, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले छात्रों की कीमत पर कोचिंग माफियाओं तथा विशेषाधिकार प्राप्त लोगों का पक्ष लेती है।
एआईवाईएफ ने नीट परीक्षा को तत्काल प्रभाव से खत्म करने की अपनी मांग को दोहराया है। संगठन का मानना है कि हालिया विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। इसके परिणामस्वरूप, एनटीए ने छात्रों तथा आम जनता का विश्वास पूरी तरह से खो दिया है।
इसके साथ ही, एआईवाईएफ ने पुरज़ोर मांग की है कि एनटीए को तत्काल भंग किया जाए और एक लोकतांत्रिक, पारदर्शी तथा छात्र-अनुकूल तरीके से परीक्षा प्रणाली का विकेंद्रीकरण किया जाए। संगठन ने इस हालिया घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने और उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाला है, उनकी पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।





