ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (एआईवाईएफ) का 67वां स्थापना दिवस तीन मई को नई दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय से लेकर पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित संपूर्ण भारत में अत्यंत हर्षोल्लास, भारी उत्साह और एक नए क्रांतिकारी संकल्प के साथ मनाया गया। देश भर के विभिन्न राज्यों, जिलों और स्थानीय स्तरों पर आयोजित अनगिनत कार्यक्रमों में झंडोत्तोलन, पौधारोपण, विचार गोष्ठियों और विशाल जनसभाओं का आयोजन किया गया। इन सभी आयोजनों में संगठन के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेतृत्व ने एक स्वर में देश के नौजवानों से एकजुट होने का आह्वान किया और बढ़ती बेरोजगारी, बेलगाम होते निजीकरण, खतरनाक स्तर पर पहुंच रही नशाखोरी और बढ़ती सामाजिक असमानता के खिलाफ अपने संघर्ष को और अधिक धारदार बनाने का शंखनाद किया।
नई दिल्ली स्थित संगठन के ऐतिहासिक केंद्रीय कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष रौशन कुमार सिन्हा ने पूरे सम्मान के साथ संगठन का ध्वज फहराकर मुख्य समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस गरिमापूर्ण अवसर पर उपस्थित तमाम युवा कार्यकर्ताओं ने महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के अतुलनीय बलिदानों को भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित किए। जनसभा को संबोधित करते हुए रौशन कुमार सिन्हा ने संगठन के गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि फायरब्रांड कम्युनिस्ट और दिल्ली नगर निगम के सबसे युवा पार्षद रहे गुरु राधा किशन की ऐतिहासिक पहल और दूरदृष्टि के परिणामस्वरूप ही 28 अप्रैल से 3 मई 1959 तक नई दिल्ली में एक विशाल छह दिवसीय सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें 11 राज्यों के 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इसी ऐतिहासिक सम्मेलन के गर्भ से एआईवाईएफ का जन्म हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य समाजवाद के वैज्ञानिक विचारों का प्रचार-प्रसार करना और विश्व लोकतांत्रिक युवा संघ से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय युवा आंदोलन का एक मजबूत हिस्सा बनना था। उन्होंने गर्व के साथ स्मरण किया कि उस समय के प्रख्यात अभिनेता और वामपंथी विचारक बलराज साहनी को संगठन का प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष, सारदा मित्रा को महासचिव और पी.के. वासुदेवन नायर को कार्यकारी समिति का अध्यक्ष चुना गया था।
इसी कड़ी में नई दिल्ली के आयोजन में मौजूद राष्ट्रीय सचिव हरीश बाला, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. राकेश विश्वकर्मा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सीरंगराज ने वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य का सूक्ष्म विश्लेषण किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार की जनविरोधी और सांप्रदायिक नीतियों के कारण आज का युवा गहरे अवसाद में है और रोजगार के अवसर लगातार सिकुड़ रहे हैं। इस दौरान केन्द्रीय कार्यालय सचिव अरशद सिद्दीकी, दिल्ली राज्य उपाध्यक्ष जोर्जकुट्टी और पूर्व राज्य सचिव शशि कुमार गौतम सहित भारी संख्या में उपस्थित छात्रों ने छात्र-युवा एकता पर जोर देते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। दिल्ली की ही तर्ज पर पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में भी नौजवानों ने स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए। विशेष रूप से पंजाब में युवाओं ने शहीद भगत सिंह के विचारों को राज्य के हर गांव और मोहल्ले तक पहुंचाने का संकल्प लिया और राज्य की सबसे बड़ी समस्या बन चुके नशे के कारोबार तथा लगातार बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ एक निर्णायक और लंबी लड़ाई लड़ने की सौगंध खाई। पूर्वी भारत के बिहार और बंगाल में भी युवाओं ने शिक्षा के बाजारीकरण और सरकारी संपत्तियों की हो रही अंधाधुंध बिक्री के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद किया।

दक्षिण भारत में भी इस स्थापना दिवस की गूंज और उत्साह अभूतपूर्व रहा। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के हिमायत नगर स्थित एआईवाईएफ राज्य मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सैयद वली उल्लाह कादरी ने पूरे क्रांतिकारी जोश के साथ संगठन का ध्वज फहराया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

इसी क्रम में हिमायत नगर स्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) राज्य मुख्यालय, मखदूम भवन में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। यहाँ प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एन. श्रीकांत और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की प्रगतिशील सोच, शहीदों के बलिदान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में एक लाल गुलाब का पौधा रोपा।


तेलंगाना के ही मेडचल जिला परिषद के तत्वावधान में ईसीआईएल स्थित नीलम राजशेखर रेड्डी भवन में स्थापना दिवस को पूरी तरह से 'संघर्ष दिवस' के रूप में चिन्हित किया गया। यहाँ राज्य महासचिव कल्लुरु धर्मेंद्र ने झंडा फहराने के बाद एक ओजस्वी भाषण दिया। उन्होंने देश में सरकारी नियुक्तियों में की जा रही भारी कटौती, ठेका प्रथा को दिए जा रहे बढ़ावे और शिक्षा की बेतहाशा बढ़ती लागत पर केंद्र और राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर 'भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम' तुरंत लागू किया जाए, सभी खाली पड़े सरकारी पदों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर भरा जाए, शिक्षा के क्षेत्र में पूर्ण रूप से मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुनिश्चित की जाए, शुल्क पर सख्त सरकारी नियंत्रण हो, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लघु व मध्यम उद्योगों को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि युवाओं को गांव में ही रोजगार मिल सके।

तेलंगाना के खम्मम शहर स्थित नलामल्ला गिरिप्रसाद भवन में भी एआईवाईएफ का 67वां स्थापना दिवस अत्यंत भव्य रूप में मनाया गया। यहाँ एआईवाईएफ के जिला प्रभारी कोंडापर्थी गोविंदा राव ने ध्वजारोहण के पश्चात हुंकार भरते हुए सत्ताधीशों से सीधा सवाल किया कि नौकरियां कहां हैं और रोजगार के वादे कहां गए। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि शासकों ने नौकरी की अधिसूचनाएं जारी करने में और देरी की, तो युवा अपने अधिकारों को छीनना जानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सबके लिए शिक्षा और सबके लिए काम का लक्ष्य प्राप्त किए बिना उनका यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। इसी कार्यक्रम में जिला सचिव नानाबाला रामकृष्ण ने जिले और पूरे राज्य में नशीले पदार्थों और गांजे की आसानी से हो रही उपलब्धता पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ड्रग माफिया जानबूझकर हताश और बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बना रहा है, जबकि प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे के इस जानलेवा जाल में फंसकर अपना जीवन नष्ट करने के बजाय सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के आंदोलनों के सिपाही बनें। इस समारोह में जिला सहायक सचिव ममिंदला श्रीनाथ रेड्डी, चिंताला रमेश, मल्लेबोइना उपेंदर, जिला कार्यकारी अध्यक्ष मद्दोज श्रावण, जिला उपाध्यक्ष गनापरापु उपेंदर सहित सैंकड़ों युवा उपस्थित रहे।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा शहर स्थित दासरी नागभूषण राव भवन में भी स्थापना दिवस का यह पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। यहाँ एआईवाईएफ के राज्य सचिव एम. युगंधर ने संगठन का लाल झंडा फहराया। इस अवसर पर एआईएसएफ के प्रदेश अध्यक्ष जी. वलाराजू, प्रदेश उपाध्यक्ष लंका गोविंदराजुलु, नगर अध्यक्ष भार्गव, नगर नेता सिंगमशेट्टी मोहन प्रसाद, आई. आंजनेयुलु, श्रीनू, विजय, स्टालिन, कनक राव और शिवा सहित भारी संख्या में युवाओं और छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और वामपंथी छात्र-युवा एकता की एक मजबूत मिसाल पेश की। पूरे देश में आयोजित इन सभी भव्य और ऊर्जावान कार्यक्रमों का समापन हवा में गूंजते 'एआईवाईएफ जिंदाबाद', 'युवा एकता जिंदाबाद' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के गगनभेदी नारों के साथ हुआ। इन आयोजनों के माध्यम से देश के युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अब मूकदर्शक नहीं रहेंगे और एक शोषणमुक्त, नशामुक्त, धर्मनिरपेक्ष और समान अवसर वाले समाज की स्थापना के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।









