बार्शी (सोलापुर, महाराष्ट्र), 26 मई 2019 : पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आज बार्शी स्थित तहसील कार्यालय पर एक विशाल और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में महंगाई के साथ-साथ किसानों और मजदूरों से जुड़े बुनियादी मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया गया। इस जन-आंदोलन का नेतृत्व प्रोफेसर तानाजी थोम्ब्रे और एटक के जिला सचिव ए. बी. कुलकर्णी ने किया। आंदोलन के दौरान वर्कर्सओं ने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे पूरा तहसील परिसर गूंज उठा।
प्रदर्शन के बाद वर्कर्सओं ने नायब तहसीलदार को अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल और दालों सहित सभी आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में तत्काल कटौती की जाए। इसके साथ ही किसानों की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, सब्सिडी के साथ सस्ती दरों पर खाद-बीज उपलब्ध कराने, खाद-बीज की जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और किसानों की कर्जमाफी को तुरंत प्रभाव से लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
ज्ञापन में श्रम और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अस्पतालों के कर्मचारियों, अंशकालिक महिला स्वास्थ्य वर्कर्सओं, स्कूली पोषण आहार कर्मचारियों, ग्राम पंचायत कर्मियों और बार्शी नगर परिषद के कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के लिए कम से कम 30,000 रुपये प्रति माह न्यूनतम वेतन तय किया जाए और सभी को पेंशन का लाभ दिया जाए। इसके अलावा, श्रम कानूनों को कमजोर करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने, शक्तिपीठ हाइवे और कुंभ मेले पर होने वाले खर्च को तुरंत निलंबित करने, नीट परीक्षा पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा शिक्षा के व्यावसायीकरण को बंद करने की मांग की गई। कम्युनिस्ट नेताओं ने किसानों व छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने, बेरोजगारों को रोजगार देने, सांप्रदायिक तनाव भड़काने वालों और छत्रपति शिवाजी महाराज की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ-साथ विधायकों व सांसदों को मिलने वाली पेंशन व्यवस्था को बंद करने की भी मांग की।
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन में भाकपा के सचिव डॉ. प्रविण मस्तुद, अनिरुद्ध नाखते, ग्राम पंचायत कर्मचारी यूनियन के सतीश गायकवाड़, ऑल इंडिया किसान सभा के लहू अगलावे, डॉ. जगदाले मामा अस्पताल कर्मचारी यूनियन के आनंद गुरव व भारत भोसले, भारती मस्तुद, संपत खताल, निर्मला सरवदे, बिभीषण हुरकुड़े, कलावती घोलवे, निर्माण मजदूर यूनियन के बालाजी शितोले, भारत चव्हाण, नानासाहेब ठाकरे, परशुराम यादव और विनोद गायकवाड़ उपस्थित थे। इनके साथ ही अंशकालिक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन से प्रमिला शिंदे, सुवर्णा नेंदने, शीतल कार्डे, सविता नागतिलक व तोलाबाई ओवाल, स्कूली पोषण आहार कर्मचारी यूनियन से सुनील भोसले, भारत लोखंडे, दुर्गा गवली व अनुराधा मंडलिक तथा बार्शी नगर पालिका अनुबंध श्रमिक यूनियन से विजय ढवड़े व केशव गायकवाड़ सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के अन्य जन-कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक शामिल हुए।





