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मास्को में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय फासीवाद-विरोधी मंच का उद्घाटन

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आतंकवाद और आक्रामकता के खिलाफ एकजुट हुआ वैश्विक वामपंथ

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ रशियन फ़ैडरेशन (सीपीआरएफ़) की केंद्रीय समिति के महासचिव गेन्नेडी ज्युगानोव द्वारा मास्को में “द स्ट्रगल अगेंस्ट इंटरनेशनल टेररिज्म, आर्बिट्रेरिनेस एंड अग्रेशन: फॉर पीस एंड सिक्योरिटी” विषय पर केंद्रित तीसरे अंतर्राष्ट्रीय फासीवाद-विरोधी मंच सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया गया। ऐतिहासिक महत्व के इस मंच पर दुनिया भर के वामपंथी नेताओं, सार्वजनिक बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साम्राज्यवाद-विरोधी एकजुटता समूहों का एक विशाल और वैचारिक समागम देखने को मिला है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है, जिसका प्रतिनिधित्व पार्टी के महासचिव डी. राजा और राष्ट्रीय सचिव रामकृष्ण पांडा कर रहे हैं। भारतीय वामपंथी नेताओं की यह भागीदारी वैश्विक स्तर पर चल रहे साम्राज्यवाद-विरोधी, शांति समर्थक और लोकतांत्रिक आंदोलनों के साथ भारतीय कामकाजी वर्ग के ऐतिहासिक और अटूट जुड़ाव को एक बार फिर मजबूती से रेखांकित करती है। यह मंच वर्तमान में प्रगतिशील और समाजवादी ताकतों को एक ऐसा साझा धरातल प्रदान कर रहा है, जहां से वे पश्चिमी आधिपत्य, नाटो के विस्तारवाद और बेलगाम सैन्य आक्रामकता के कारण उत्पन्न हो रही वैश्विक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक मुकाबला करने के लिए एक ठोस और प्रभावी जवाबी रणनीति तैयार कर सकें।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की शुरुआत करते हुए सीपीआरएफ के महासचिव गेन्नेडी ज्युगानोव ने 100 से अधिक देशों के 70 से अधिक राजनीतिक दलों और विभिन्न जनसंगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधियों का स्वागत किया और अपने मुख्य संबोधन में वैश्विक राजनीति की मौजूदा गंभीर परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में उग्र-दक्षिणपंथी विचारधाराओं, नव-राष्ट्रवाद, विदेशी लोगों के प्रति बढ़ती नफरत और आधुनिक नव-फासीवादी प्रवृत्तियों के खतरनाक पुनरुत्थान को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया। ज्युगानोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिमी शक्तियों का आक्रामक सैन्य हस्तक्षेप और एकध्रुवीय व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशें संप्रभु राष्ट्रों को अस्थिर कर रही हैं, जिससे आम जनता को युद्ध और तबाही का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खात्मे, भू-राजनीतिक स्थिरता और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की बहाली के लिए दुनिया भर के कामकाजी वर्ग, वामपंथी दलों और देशभक्त ताकतों के बीच एक अटूट और व्यापक एकजुटता का पुरजोर आह्वान किया।

सीपीआरएफ महासचिव गेन्नेडी ज्युगानोव के साथ भाकपा महासचिव डी. राजा एवं राष्ट्रीय सचिव रामकृष्ण पांडा

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के भू-राजनीतिक महत्व और इसकी गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वयं इस मंच और इसके प्रतिभागियों के लिए एक विशेष और औपचारिक शुभकामना संदेश भेजा। राष्ट्रपति पुतिन ने अपने संदेश में समकालीन दुनिया के संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि आज जब पूरी मानवता गंभीर चुनौतियों, क्षेत्रीय संघर्षों और बढ़ती अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब एक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए सभी रचनात्मक और प्रगतिशील ताकतों का एकजुट होना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर इस धरती पर विनाशकारी, नस्लवादी और घृणा फैलाने वाली विचारधाराओं के प्रसार को हर हाल में रोकना होगा और साथ ही फासीवाद के खिलाफ लड़े गए ऐतिहासिक संघर्षों और द्वितीय विश्व युद्ध की सच्चाई की रक्षा करनी होगी। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के शीर्ष राजनयिकों की मौजूदगी ने भी इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता को बढ़ाया, जिसमें ज्युगानोव के विशेष निमंत्रण पर दक्षिण ओसेशिया के रूस में राजदूत नौर गासिएव सहित कई महत्वपूर्ण रणनीतिक हस्तियां शामिल हुईं।

इस बहु-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मंच के आगामी सत्रों के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेता डी. राजा और रामा कृष्ण पांडा विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य समूहों को संबोधित करेंगे, जिसमें वे विशेष रूप से दक्षिण एशिया के संदर्भ में साम्राज्यवाद और नव-उपनिवेशवाद के क्षेत्रीय प्रभावों तथा क्षेत्रीय शांति के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों पर भारत का दृष्टिकोण साझा करेंगे। पूरे विचार-विमर्श और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के वक्तव्यों के बाद, इस सम्मेलन का समापन एक साझा अंतरराष्ट्रीय घोषणापत्र यानी 'फासीवाद-विरोधी मेनिफेस्टो' के साथ होने की उम्मीद है। इस अंतिम घोषणापत्र के जरिए दुनिया भर की वामपंथी और प्रगतिशील ताकतें एक स्वर में बहुध्रुवीय वैश्विक ढांचे की वकालत करेंगी, पश्चिमी देशों द्वारा थोपे जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल समाप्त करने की मांग करेंगी और संप्रभु राष्ट्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने का वैश्विक संकल्प लेंगी।

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