नई दिल्ली : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की दिल्ली राज्य परिषद के तत्वावधान में रविवार, 17 मई 2026 को एक दिवसीय गहन राजनीतिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस शिविर में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, प्रख्यात विचारकों और शिक्षाविदों ने पांच अलग-अलग सत्रों में महत्वपूर्ण वैचारिक व सांगठनिक विषयों पर कक्षाएं लीं। शिविर का मुख्य उद्देश्य वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी संगठन को वैचारिक रूप से सुदृढ़ करना और जन-आंदोलनों को तेज करना था।
पांच सत्रों में हुआ वैचारिक मंथन
शिविर की शुरुआत भाकपा राष्ट्रीय सचिव, सांसद एवं भाकपा दिल्ली राज्य के राष्ट्रीय प्रभारी पी. संदोष कुमार के वक्तव्य से हुई। उन्होंने "पार्टी, संगठन का महत्व व राजनीतिक परिस्थिति" विषय पर पहली कक्षा लेते हुए शिविर का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने वर्तमान दौर की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर विशेष बल दिया।
इसके बाद, अकादमिक जगत के जाने-माने हस्ताक्षर प्रोफेसर अजय पटनायक ने "मार्क्सवाद-लेनिनवाद व अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व परिस्थितियां" विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने वैश्विक परिदृश्य में हो रहे बदलावों और मार्क्सवादी दृष्टिकोण से उनके विश्लेषण की आवश्यकता को समझाया।
तीसरे सत्र में प्रोफेसर सुबोध नारायण मालाकार ने "मार्क्सवाद व सामाजिक न्याय" विषय पर क्लास ली। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे मार्क्सवादी दर्शन के जरिए ही समाज के हाशिए पर मौजूद लोगों को वास्तविक सामाजिक न्याय दिलाया जा सकता है।
दोपहर के भोजन के बाद, सांगठनिक और ऐतिहासिक समझ को गहरा करने के लिए भाकपा राष्ट्रीय शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल अनिल राजिमवाले ने मोर्चा संभाला। उन्होंने "आज़ादी से पहले व बाद में कम्युनिस्ट पार्टी व जनवाद" विषय पर विस्तार से चर्चा की और भारतीय लोकतंत्र व जनवादी अधिकारों की रक्षा में कम्युनिस्टों के ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
शिविर के अंतिम सत्र में सचिव, भाकपा दिल्ली राज्य परिषद व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय ने "पार्टी, उसका ढांचा, लेनिन के संगठन के सिद्धांत व संगठन के राजनीतीकरण" पर गंभीर विमर्श किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेनिनवादी सांगठनिक सिद्धांतों का पालन करके ही हम एक अनुशासित और जन-केंद्रित राजनैतिक विकल्प खड़ा कर सकते हैं।

कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी और जीवंत संवाद
इस राजनीतिक प्रशिक्षण शिविर में भाकपा दिल्ली राज्य के कुल 77 पार्टी ब्रांचों के सचिवों, सहायक सचिवों, राज्य परिषद सदस्यों और विभिन्न जनसंगठनों के शीर्ष नेतृत्व ने हिस्सा लिया।
शिविर का माहौल बेहद लोकतांत्रिक और संवादपूर्ण रहा। वैचारिक सत्रों के बाद प्रश्नकाल का आयोजन किया गया, जिसमें 11 साथियों ने कुल 33 विचारोत्तेजक प्रश्न पूछे। मंच पर मौजूद पांचों वक्ताओं ने सभी सवालों के विस्तार से और संतोषजनक उत्तर दिए, जिससे उपस्थित कार्यकर्ताओं की वैचारिक समझ और स्पष्ट हुई।
भविष्य की योजनाएँ : 30 अगस्त तक जिलों में होंगे शिविर
शिविर के समापन पर दिल्ली राज्य परिषद द्वारा एक महत्वपूर्ण सांगठनिक निर्णय लिया गया। सर्वसम्मिति से यह तय किया गया कि इस वैचारिक अभियान को केवल राज्य स्तर तक सीमित न रखकर निचले स्तर तक ले जाया जाएगा।
दिल्ली के सभी जिले 30 अगस्त 2026 तक अपने-अपने क्षेत्रों में इसी तर्ज पर जिला स्तरीय राजनीतिक प्रशिक्षण शिविरों का अनिवार्य रूप से आयोजन करेंगे, ताकि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को भी वैचारिक रूप से लैस किया जा सके।
यह शिविर दिल्ली में वामपंथी आंदोलन को और अधिक धार देने तथा आने वाले समय में जन-मुद्दों पर संघर्ष को तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।





