हैदराबाद, 14 मई 2026 : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय के बेटे बंदी भगीरथ पर दर्ज पॉक्सो मामले को लेकर तेलंगाना में सियासी और सामाजिक उबाल तेज हो गया है। एक नाबालिग लड़की से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मामले में एफआईआर दर्ज हुए एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद, आरोपी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में ऑल इंडिया यूथ फ़ैडरेशन (एआईवाईएफ) की तेलंगाना स्टेट काउंसिल ने मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार को एआईवाईएफ के कार्यकर्ताओं ने रेवंत रेड्डी सरकार के रवैये और पुलिसिया कार्रवाई में हो रही देरी के खिलाफ हैदराबाद के हिमायत नगर स्थित वाई-जंक्शन चौराहे पर आंखों पर पट्टी बांधकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कानून आम आदमी के लिए अलग और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के लिए अलग तरीके से काम कर रहा है।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एआईवाईएफ के राज्य सचिव कल्लूरु धर्मेंद्र और राज्य कार्यकारी अध्यक्ष नेरलाकांति श्रीकांत ने प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मामले में सिट (एसआईटी) का गठन कर देना ही काफी नहीं है। सिट कहीं महज दिखावा ("शिट") बनकर न रह जाए, बल्कि उसे सही मायने में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। नेताओं ने पूछा कि क्या सिट सच में राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम कर पाएगी? एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई न होने से सरकार की निष्पक्षता पर पहले ही गंभीर संदेह उत्पन्न हो चुके हैं।
एआईवाईएफ नेताओं ने भाजपा नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि अगर किसी आम युवक पर ऐसे आरोप लगते हैं, तो पुलिस कुछ ही घंटों में उसे गिरफ्तार कर मीडिया के सामने पेश कर देती है। लेकिन जब बात बड़े राजनीतिक नेताओं के परिवारों की आती है, तो कानून कछुए की गति से चलने लगता है।
उन्होंने सवाल किया, "क्या यही संविधान की भावना और समान न्याय है? महिलाओं की सुरक्षा पर पूरे देश में भाषण देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 'बेटी बचाओ' का प्रचार करने वाला भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अब चुप क्यों है? एक केंद्रीय मंत्री के परिवार के सदस्य पर इतने गंभीर आरोप लगने के बावजूद भाजपा का एक शब्द भी न बोलना उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है।"
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आने वाले दिनों में न्यायालय से आरोपी को जमानत या अंतरिम राहत मिल भी जाती है, तो इसका मतलब उसका निर्दोष होना नहीं है। सत्ता का प्रभाव, राजनीतिक दबाव और जांच में देरी के कारण आम जनता का न्यायपालिका से विश्वास उठ रहा है।
एआईवाईएफ ने मांग की है कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि एक नाबालिग से जुड़ा पॉक्सो मामला है। इसलिए माननीय न्यायालय को कानूनी मानकों को सख्ती से लागू करते हुए, पूर्ण रूप से निष्पक्ष होकर पीड़िता के अधिकारों और उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन में एआईवाईएफ के राज्य उपाध्यक्ष श्रीमान, राज्य कार्यकारिणी के सदस्य सलमान बेग, शेख महमूद, अविनाश, भरत, चेट्टुकिंडी श्रीनिवास सहित कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।





